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पंच परमेश्वर frame

पंच परमेश्वर

by प्रेमचंद

यह कहानी दो अभिन्न मित्रों, जुम्मन शेख और अलगू चौधरी के इर्द-गिर्द घूमती है। उनकी दोस्ती इतनी गहरी थी कि एक के बाहर जाने पर दूसरा उसके घर की देखभाल करता था। कहानी में मोड़ तब आता है जब जुम्मन की बूढ़ी खाला (मौसी) अपनी जायदाद जुम्मन के नाम कर देती है, इस शर्त पर कि वह उनकी सेवा करेगा। लेकिन रजिस्ट्री होते ही जुम्मन और उसकी पत्नी का व्यवहार बदल जाता है। तंग आकर खाला पंचायत बुलाती हैं। जुम्मन निश्चिंत था कि उसका मित्र अलगू उसके पक्ष में फैसला सुनाएगा। लेकिन जब अलगू 'सरपंच' की कुर्सी पर बैठता है, तो उसे न्याय की गरिमा का बोध होता है। वह अपनी दोस्ती को पीछे छोड़कर खाला के पक्ष में फैसला सुनाता है। इससे जुम्मन और अलगू की दोस्ती टूट जाती है और जुम्मन बदला लेने की ताक में रहने लगता है। कुछ समय बाद, अलगू चौधरी एक कानूनी मुसीबत में फंस जाता है जब उसका एक बैल मर जाता है और खरीदार (समझू साहु) पैसे देने से मना कर देता है। इस बार पंचायत में जुम्मन शेख को सरपंच बनाया जाता है। अलगू को लगता है कि जुम्मन अब उससे बदला लेगा। लेकिन जैसे ही जुम्मन न्याय के सिंहासन पर बैठता है, उसे अपनी जिम्मेदारी का एहसास होता है। वह सत्य और न्याय के साथ चलता है और अलगू के पक्ष में फैसला सुनाता है। दोनों मित्र गले मिलते हैं और यह स्वीकार करते हैं कि "पंच की वाणी में परमेश्वर का वास होता है।"

The Necklace frame

The Necklace

by Guy de Maupassant

Mathilde Loisel is a beautiful woman born into a family of clerks who feels "destination" has cheated her out of a life of luxury. When her husband secures an invitation to a prestigious ball, Mathilde is miserable because she has nothing "grand" to wear. She buys a dress and borrows a stunning diamond necklace from her wealthy friend, Madame Forestier. For one night, Mathilde is the star of the ball, living her dream. However, the dream turns into a nightmare when she realizes she has lost the necklace. To avoid disgrace, the couple spends their life savings and takes out massive loans to buy a $36,000 replacement, which they return to Forestier without telling her of the loss. For ten years, they live in grinding poverty to pay back the debt. Mathilde loses her beauty and youth to hard manual labor. One day, she runs into Forestier and confesses the truth, only to learn the cruelest irony: the original necklace was a fake, worth no more than five hundred francs.

रानी केतकी की कहानी frame

रानी केतकी की कहानी

by इंशा अल्ला ख़ाँ

रानी केतकी की कहानी हिंदी गद्य की प्रारम्भिक और महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक है। यह कथा राजा उदयभान की पुत्री रानी केतकी और राजकुमार कुंवर प्रतापसिंह के प्रेम, वियोग और पुनर्मिलन की कहानी है। कथा में रानी केतकी की सुंदरता, बुद्धिमत्ता और दृढ़ चरित्र का वर्णन किया गया है। षड्यंत्रों और परिस्थितियों के कारण दोनों प्रेमी अलग हो जाते हैं और अनेक कठिनाइयों का सामना करते हैं। अंततः सत्य और प्रेम की विजय होती है तथा दोनों का मिलन हो जाता है। यह रचना अपनी विशिष्ट भाषा-शैली के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें लेखक ने संस्कृत, फारसी और अरबी शब्दों से बचते हुए सरल बोलचाल की हिंदी का प्रयोग किया है। यह कृति हिंदी गद्य के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है।

पिंजरा frame

पिंजरा

by उपेंद्रनाथ अश्क

पिंजरा एक मार्मिक कहानी है जो नारी की मानसिक गुलामी और सामाजिक बंधनों को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करती है। कहानी की नायिका एक शिक्षित और संवेदनशील स्त्री है, जो विवाह के बाद अपने पति और ससुराल के संकीर्ण विचारों में बँधकर रह जाती है। बाहर से उसका जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक दिखाई देता है, लेकिन भीतर वह स्वयं को एक पिंजरे में कैद महसूस करती है। पति का अधिकारभाव, समाज की अपेक्षाएँ और परंपराएँ उसके व्यक्तित्व और स्वतंत्रता को कुचल देती हैं। धीरे-धीरे नायिका को यह बोध होता है कि यह पिंजरा भौतिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक है। कहानी स्त्री-स्वतंत्रता, आत्मचेतना और समान अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है तथा समाज के रूढ़िवादी ढांचे पर तीखा प्रश्न उठाती है।

परिंदे frame

परिंदे

by निर्मल वर्मा

परिंदे एक संवेदनशील और मनोवैज्ञानिक कहानी है, जो आधुनिक व्यक्ति की अकेलापन, असुरक्षा और संबंधों की टूटन को उजागर करती है। कहानी में पात्र बाहरी रूप से साथ रहते हुए भी आंतरिक रूप से एक-दूसरे से कटे हुए दिखाई देते हैं। ‘परिंदे’ स्वतंत्रता और अस्थिरता का प्रतीक हैं—जो उड़ तो सकते हैं, पर कहीं टिक नहीं पाते। कथा में मौन, संकेत और सूक्ष्म भावनाओं के माध्यम से यह दिखाया गया है कि आधुनिक जीवन में मनुष्य भावनात्मक जुड़ाव से वंचित हो गया है। पात्र अपने-अपने भय, संकोच और अधूरेपन के कारण संबंधों में स्थायित्व नहीं ला पाते। कहानी अस्तित्वगत पीड़ा, अकेलेपन और मानवीय संबंधों की नाजुकता को गहराई से प्रस्तुत करती है और पाठक को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है।

भोलाराम का जीव frame

भोलाराम का जीव

by Harishankar Parsai

भोलाराम का जीव एक व्यंग्यात्मक कहानी है, जो सरकारी व्यवस्था की भ्रष्टाचारपूर्ण और अमानवीय प्रकृति पर तीखा प्रहार करती है। कहानी में भोलाराम नामक एक ईमानदार, साधारण व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका “जीव” यमलोक पहुँचता है, लेकिन वहाँ भी उसकी आत्मा का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता। कारण यह है कि जीवनभर उसने कभी रिश्वत नहीं दी, इसलिए उसकी फ़ाइल सरकारी दफ़्तरों में आगे ही नहीं बढ़ी। यमलोक के अधिकारी उसे ढूँढने के लिए पृथ्वी पर भेजते हैं, जहाँ सरकारी दफ़्तरों की लालफीताशाही, घूसखोरी और संवेदनहीनता उजागर होती है। अंततः पता चलता है कि भोलाराम का जीव तब तक मुक्त नहीं हो सकता, जब तक उसकी पेंशन की फ़ाइल पास न हो जाए। यह कहानी हास्य के माध्यम से भ्रष्टाचार, नौकरशाही और आम आदमी की पीड़ा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

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दो आस्थाएँ

by Amritlal Nagar

दो आस्थाएँ विचारप्रधान कहानी है, जिसमें दो भिन्न विश्वास-प्रणालियों और जीवन-दृष्टियों का संघर्ष दिखाया गया है। कहानी ऐसे पात्रों के माध्यम से आगे बढ़ती है, जो परंपरा, धर्म और रूढ़ आस्थाओं में विश्वास रखते हैं, जबकि दूसरी ओर तर्क, मानवता और वैज्ञानिक सोच को मानने वाले लोग हैं। दोनों आस्थाओं के टकराव से यह स्पष्ट होता है कि अंधविश्वास और कट्टरता समाज को पीछे ले जाती है, जबकि विवेक, सहिष्णुता और मानवीय मूल्य जीवन को सही दिशा देते हैं। लेखक यह संदेश देता है कि सच्ची आस्था वही है जो मनुष्य को मानवता, करुणा और सामाजिक कल्याण की ओर ले जाए। कहानी समाज में बदलती चेतना और नई सोच के महत्व को रेखांकित करती है।

मलबे का मालिक frame

मलबे का मालिक

by Mohan Rakesh

मलबे का मालिक विभाजन के बाद के सामाजिक-मानसिक यथार्थ को प्रस्तुत करने वाली कहानी है। कहानी का केंद्र एक ऐसा व्यक्ति है, जो दंगों और हिंसा के बाद उजड़े हुए घरों और टूटे हुए शहर में लौटता है। चारों ओर केवल मलबा, खंडहर और बीते जीवन की स्मृतियाँ बची हैं। लोग अपने पुराने घरों और संपत्ति पर अधिकार जताते हैं, लेकिन वास्तविकता में कोई भी उस मलबे का सच्चा “मालिक” नहीं रह गया। कहानी यह प्रश्न उठाती है कि जब मानवता, रिश्ते और मूल्य नष्ट हो जाएँ, तब केवल भौतिक संपत्ति का स्वामित्व निरर्थक हो जाता है। यह रचना विस्थापन, पीड़ा, पहचान-संकट और टूटे हुए मानवीय संबंधों की गहरी अभिव्यक्ति है।

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लालपान की बेगम

by Phanishwarnath Renu

लालपान की बेगम ग्रामीण जीवन की यथार्थवादी और करुण तस्वीर प्रस्तुत करने वाली कहानी है। कहानी लालपान नामक व्यक्ति और उसकी बेगम के इर्द-गिर्द घूमती है। लालपान की बेगम सीधी, सहनशील और त्यागमयी स्त्री है, जो अपने पति के स्वभाव, गरीबी और सामाजिक परिस्थितियों के बीच जीवन जीती है। वह पति की उपेक्षा, कठोर व्यवहार और समाज की उदासीनता को चुपचाप सहती रहती है। रेणु ने उसकी पीड़ा, मौन संघर्ष और आंतरिक मजबूती को अत्यंत संवेदनशीलता से चित्रित किया है। यह कहानी ग्रामीण समाज में स्त्री की स्थिति, गरीबी, मानवीय संवेदना और चुपचाप सहने वाली नारी-शक्ति को उजागर करती है। भाषा में लोक-रंग और सहजता रेणु की विशेष पहचान है।

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कफ़न

by Munshi Premchand

कफ़न सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनहीनता को उजागर करने वाली कहानी है। कहानी घीसू और उसके बेटे माधव के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अत्यंत गरीब, आलसी और कामचोर हैं। माधव की पत्नी बुधिया प्रसव पीड़ा से तड़पती रहती है, लेकिन दोनों उसकी सहायता करने के बजाय आग तापते रहते हैं। अंततः बुधिया की मृत्यु हो जाती है। गाँव वाले दया दिखाकर कफ़न के लिए पैसे दे देते हैं, पर घीसू और माधव उन पैसों से शराब और भोजन कर लेते हैं। वे तर्क देते हैं कि जीवित रहते किसी ने मदद नहीं की, तो मृत शरीर को कफ़न से क्या लाभ। यह कहानी गरीबी, सामाजिक अन्याय, नैतिक पतन और मानवता के क्षरण पर तीखा व्यंग्य करती है तथा दिखाती है कि घोर अभाव मनुष्य को किस हद तक संवेदनहीन बना सकता है।

ईदगाह frame

ईदगाह

by Munshi Premchand

ईदगाह एक भावनात्मक कहानी है, जो बाल-मन की करुणा, त्याग और सच्चे प्रेम को दर्शाती है। कहानी का नायक हामिद एक गरीब अनाथ बालक है, जो अपनी दादी अमीना के साथ रहता है। ईद के दिन जब गाँव के बच्चे मेले में खिलौने और मिठाइयाँ खरीदते हैं, हामिद के पास केवल तीन पैसे होते हैं। वह अपने लिए कुछ न लेकर दादी के हाथ जलने से बचाने के लिए चिमटा खरीद लेता है। बच्चे उसका मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन हामिद का त्याग और समझदारी सबका दिल जीत लेती है। जब वह चिमटा दादी को देता है, तो अमीना की आँखें भर आती हैं। यह कहानी सिखाती है कि सच्चा सुख स्वार्थ में नहीं, बल्कि दूसरों के लिए किए गए निःस्वार्थ प्रेम और त्याग में है।

मसाला चाय frame

मसाला चाय

by Tanya Luther Agarwal

Discover a hidden gem in our collection. While this book currently lacks a detailed summary, it offers a unique journey waiting to be explored. Dive into the pages to uncover the characters, ideas, and stories that make this title special. Click 'Read Now' to start your adventure.

लापता पानी का मामला frame

लापता पानी का मामला

by Shalini Srinivasan

Discover a hidden gem in our collection. While this book currently lacks a detailed summary, it offers a unique journey waiting to be explored. Dive into the pages to uncover the characters, ideas, and stories that make this title special. Click 'Read Now' to start your adventure.

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