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माखन चोर श्रीकृष्ण की कहानी frame

माखन चोर श्रीकृष्ण की कहानी

by Mohit Pandey

गोकुल की हवाओं में एक नन्ही सी हंसी गूंज रही थी। वहां का हर कोना खुशियों से भर गया था, क्योंकि नंद और यशोदा के घर में श्री कृष्ण, वह नटखट बालक, खेल-कूद मचाए हुए था। मथुरा से गुपचुप लाया गया यह बच्चा अब गोकुल की जान बन चुका था। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें और मासूम मुस्कान देखकर गोप-गोपियां भी उसकी शरारतों पर हंसने को मजबूर हो जाती थीं। लेकिन सबसे बड़ी बात थी उसकी माखन चोरी! आइए, इस मजेदार और चमत्कारी कहानी में चलते हैं, जिसमें कृष्ण की नटखटता और दामोदर लीला का अनोखा रंग भी शामिल है।

श्रीमद्भागवत गीता की 18 ज्ञान की बातें frame

श्रीमद्भागवत गीता की 18 ज्ञान की बातें

by Shivam SSV

श्रीमद्भागवत गीता महाभारत का एक पवित्र ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में हुआ संवाद वर्णित है। अर्जुन युद्ध से विचलित होकर अपने कर्तव्य को लेकर संशय में पड़ जाता है, तब श्रीकृष्ण उसे कर्म, ज्ञान, भक्ति और योग का उपदेश देते हैं। गीता सिखाती है कि मनुष्य को बिना फल की इच्छा किए अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। आत्मा अमर है और शरीर नश्वर। सच्चा सुख आत्मज्ञान, संयम और ईश्वर-भक्ति से प्राप्त होता है। गीता जीवन में संतुलन, निस्वार्थ कर्म और आत्मिक उन्नति का मार्ग दिखाती है और मनुष्य को भय, मोह व अहंकार से मुक्त होकर धर्म के पथ पर चलने की प्रेरणा देती है।

भगवत गीता अध्याय एक - अर्जुनविषादयोग frame

भगवत गीता अध्याय एक - अर्जुनविषादयोग

by Shrimad Bhagwat Geeta

अर्जुनविषादयोग में कुरुक्षेत्र के युद्ध से पहले की स्थिति का वर्णन है। अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से अपने रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले जाने को कहते हैं, ताकि वह अपने स्वजन और गुरुओं को देख सके। युद्धभूमि में अपने ही संबंधियों—पितामह भीष्म, गुरु द्रोण, कौरवों और मित्रों—को देखकर अर्जुन का मन विषाद से भर जाता है। उसके हाथ काँपने लगते हैं, धनुष गिर जाता है और वह युद्ध करने से इंकार कर देता है। अर्जुन को लगता है कि अपनों को मारकर प्राप्त किया गया राज्य पापपूर्ण होगा। वह करुणा, मोह और कर्तव्य-भ्रम में पड़ जाता है। यह अध्याय मानव मन की दुर्बलता, करुणा और धर्म-संकट को दर्शाता है तथा आगे श्रीकृष्ण के उपदेश का आधार बनता है।

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