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लालपान की बेगम

Author: Phanishwarnath Renu
Publisher: LeafyReads
Language: Hindi, English
Type: Story, Fiction
Published: 10-01-2026 01:46 PM

About this story

'क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं देखने जाएगी क्‍या ? बिरजू की माँ शकरकंद उबालकर बैठी मन-ही-मन कुढ़ रही थी अपने आँगन में । सात साल का लड़का बिरजू शकरकंद के बदले तमाचे खाकर आँगन में लोटलोटकर सारी देह में मिट्टी मल रहा था | चम्पिया के सिर भी चुड़ल मँडरा रही है -““आध-आँगन धूप रहते जो गयी है सहुआइन की दूकान छोवा-गुड़ जाने, सो अभी तक नही लौटी, दीया-बाती की बेला हो गयी । आए आज लौट के ज़रा ! बागड़ बकरे की देह में कुकुरमाछी लगी थी, इसलिए बेचारा बागड़ रह-रहकर कद-फाँद कर रहा था । बिरजू की माँ बागड पर मन का गुस्सा उतारने का बहाना दूँढ़कर निकाल चुकी थी ।'' पिछवाड़े की मिर्च की फूली गाछ * बागड़ के सिवा और किसने कलेवा किया होगा ! बागड को मारने के लिए वह मिट्टी का एक छोटा ढेला उठा चुकी थी कि पड़ासिन मखनी फुआ की पुकार सुनायी पड़ी, क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नही जाएगी क्‍या ?' “बिरजू की माँ के आगे नाथ और पीछे पग हिया न हो तब न, फुआ ! गरम गुस्से में बुझी नुकीली बात फुआ की देह में धेंस गयी और बिरजू को माँ ने हाथ के ढेले को पास ही फेंक दिया ' 'बेचारे बागड़ को कुकुरमाछी परीशान कर रही है ! आ-हा, आय '' ....

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